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कश्मीर: चीनी मीडिया ने नहीं छापा भारत का पक्ष

Edited By Priyesh Mishra |

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

पीएम मोदी-जिनपिंग और इमरान खानपीएम मोदी-जिनपिंग और इमरान खान

हाइलाइट्स

  • चीन-पाकिस्तान गठजोड़ का मिला एक और मजबूत सबूत, भारतीय दूतावास के बयान को प्रकाशित करने से चीनी सरकारी मीडिया का इनकार
  • ग्लोबल टाइम्स ने कश्मीर पर पाकिस्तानी राजदूत के झूटे दावों को किया था प्रकाशित, भारत ने जवाब प्रकाशित करने को कहा तो चीनी मीडिया ने मना किया
  • पाकिस्तानी राजदूत के झूठे दावों की भारत ने निकाली हवा, आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया अपना पक्ष

पेइचिंग


चीन की सरकारी मीडिया भारत को लेकर किस तरह नकारात्मक दृष्टिकोण रखती है इसकी जानकारी चीन में स्थित भारतीय दूतावास ने दी है। दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा है कि चीन की सरकार नियंत्रित मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने 7 अगस्त को कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के राजदूत मोइन उल हक के झूठे दावों को प्रकाशित किया था। लेकिन जब भारतीय दूतावास ने इस संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत किया तो ग्लोबल टाइम्स ने इसे प्रकाशित करने से साफ इनकार कर दिया।


भारत ने पाक-चीन गठजोड़ का भंडाफोड़ किया


भारतीय दूतावास ने अपने बयान को आधिकारिक ट्विटर हेंडल पर शेयर कर इस पूरे मामले की जानकारी दी है। इस बयान ने भारतीय दूतावास ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इस मामले में पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं पाकिस्तानी राजदूत की गलतबयानी से हमें कोई आश्चर्य भी नहीं हुआ है।

अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद कश्मीर का विकास तेज हुआ


भारतीय दूतावास ने इस बयान में आगे कहा कि जम्मू और कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से महत्वपूर्ण प्रगति की है और इसे छिपाया नहीं जा सकता है। घाटी में इस फैसले से सकारात्मक सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक अधिकारों का अधिक प्रभावी संरक्षण और संवर्धन हुआ है। इस फैसले से खासकर महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक समाज को विशेष फायदा हुआ है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे उल्लेखनीय काम


अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद से जम्मू और कश्मीर में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी ढांचों के निर्माण को लेकर उल्लेखनीय काम हुआ है। इस क्षेत्र में 50 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित किया गया है। पिछले एक साल में 5 लाख से ज्यादा कश्मीरी छात्रों को सरकारी छात्रवृति दी गई है। स्टेट ऑफ ऑर्ट हॉस्पिटल्स, मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।


भारत ने पाकिस्तान पर साधा निशाना


भारत के इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को स्थापित करने के प्रयासों को पाकिस्तान बाधित कर रहा है। सीमा पार से आतंकवाद के जरिए पाकिस्तान इस क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर 2020 के शुरुआती 7 महीनों में 3000 से अधिक बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर आतंकियों के घुसपैठ के लिए रास्ता उपलब्ध कराया है।

29 घंटे की यात्रा करके पहुंचे B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर

  • 29 घंटे की यात्रा करके पहुंचे B-2  स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर

    अमेरिका के इंडो-पैसफिक कमान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तीन B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर डियागो गार्सिया में तैनात किए गए हैं। ये विमान करीब 29 घंटे की यात्रा करके अमेरिका के मिसौरी एयरफोर्स बेस से डियागो गार्सिया पहुंचे हैं। अमेरिका ने कहा क‍ि 29 घंटे की यह यात्रा यह दर्शाती है कि अमेरिका अपने दोस्‍तों और सहयोगियों की मदद के लिए बेहद घातक और लंबी दूरी तक किसी भी समय और कहीं भी हमला करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यूएस एयरफोर्स के कमांडर कर्नल क्रिस्‍टोफर कोनंत ने कहा, ‚हम डियागो गार्सिया जैसी महत्‍वपूर्ण जगह पर आकर बहुत रोमांचित महसूस कर रहे हैं।‘

  • 'कोरोना के बाद भी हम दोस्‍तों की मदद को प्रतिबद्ध'

    कमांडर कोनंत ने कहा कि यह बॉम्‍बर टॉस्‍कफोर्स हमारी नैशनल डिफेंस स्‍ट्रेटजी का हिस्‍सा है। हम (हिंद महासागर में) अपने दोस्‍तों और सहयोगियों के साथ रिश्‍तों को मजबूत करने के साथ-साथ अपने हमला करने की धार को और ज्‍यादा तेज कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि कोरोना वायरस संकट के बाद भी एयरफोर्स इंडो-पैसफिक इलाके में सहयोग करने और रक्षा मंत्रालय के देश के रणनीतिक लक्ष्‍यों का हासिल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बता दें कि अमेरिका का स्‍ट्रेटजिक कमान अक्‍सर B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर को खतरे और जरूरत के हिसाब से दुनिया के अलग-अलग हिस्‍सों में तैनात करता रहा है।

  • भारत-चीन तनाव, हिंद महसागर पहुंचे परमाणु बॉम्‍बर

    अमेरिकी वायुसेना ने बताया कि इससे पहले जनवरी 2019 में अंतिम बार B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर हिंद महासागर में हवाई द्वीप पर तैनात किए गए थे। इसके साथ करीब 200 एयरमैन हवाई में तैनात किए गए थे। माना जा रहा है कि करीब डेढ़ साल बाद परमाणु बॉम्‍बर की इस तैनाती के जरिए अमेरिका ने चीन और ईरान को बड़ा संदेश दिया है। ये बॉम्‍बर ऐसे समय पर डियागो गार्सिया पहुंचे हैं जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा विवाद चरम पर पहुंच गया है। चीन ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना और फाइटर जेट भारत से सटी सीमा पर तैनात किए हैं। लद्दाख में चीन की इस दादागिरी की अमेरिका ने खुलकर आलोचना की है। यही नहीं कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर ने मलक्‍का स्‍ट्रेट पार करके भारतीय नौसेना के साथ अंडमान निकोबार के पास सैन्‍य अभ्‍यास किया था। यही इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। ईरान और चीन के बीच सैन्‍य और आर्थिक सहयोग नई ऊंचाईयों पर पहुंच गए हैं।

  • जानें, क्‍यों दुनिया का सबसे घातक बॉम्‍बर है B-2 स्प्रिट

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि B-2 स्प्रिट दुनिया का सबसे घातक बॉम्‍बर है। यह बमवर्षक विमान एक साथ 16 B61-7 परमाणु बम ले जा सकता है। हाल ही में इसके बेड़े में बेहद घातक और सटीक मार करने वाले B61-12 परमाणु बम शामिल किए गए हैं। यह परमाणु रेडार की पकड़ में नहीं आता है और चुपके से हमले को अंजाम देने में सक्षम है। यही नहीं यह दुश्‍मन के हवाई डिफेंस को चकमा देकर आसानी से उसके इलाके में घुस जाता है। इस बॉम्‍बर पर एक हजार किलो के परंपरागत बम भी तैनात किए जा सकते हैं। यह दुश्‍मन की जमीन पर हमला करने में सबसे कारगर बॉम्‍बर माना जाता है। वर्ष 1997 में एक B-2 स्प्रिट बॉम्‍बर की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर थी। अमेरिका के पास कुल 20 B-2 स्प्रिट स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर हैं। यह बॉम्‍बर 50 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए 11 हजार किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम है। एक बार रिफ्यूल कर देने पर यह 19 हजार किलोमीटर तक हमला कर सकता है। इस विमान ने कोसोवा, इराक, अफगानिस्‍तान और लीबिया में अपनी क्षमता साबित की है।

  • भारत के लिए बेहद अहम है डियागो गार्सिया नेवल बेस

    अमेरिका का डियागो गार्सिया नेवल बेस न केवल भारत बल्कि पूरे हिंद महासागर के लिए खास है। दरअसल, हिंद महासागर के केंद्र में स्थित चागोस द्वीपसमूह में लगभग 60 द्वीपसमूह और सात एटोल शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया है। यह द्वीपसमूह बहुत छोटा है जिसका क्षेत्रफल महज 60 वर्ग किलोमीटर और 698 किलोमीटर लंबी तटरेखा है। इस द्वीप का स्‍वामित्‍व अभी ब्रिटेन के पास है और उसने इसे अमेरिका को दे दिया है। चागोस द्वीप समूह, हिंद महासागर के मध्य में स्थित है, जो पश्चिम में अफ्रीकी मुख्य भूमि के तट से और पूर्व में दक्षिण-पूर्व एशिया से लगभग सामान दूरी पर है। इस द्वीप के पश्चिम में सोमालिया का तट और इसके पूर्व में सुमात्रा का तट स्थित है, दोनों लगभग 1,500 समुद्री मील दूर हैं। चागोस द्वीपसमूह, भारतीय उप-महाद्वीप के दक्षिण से लगभग 1,000 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है।

  • डियागो गार्सिया से कई जंग लड़ चुका है अमेरिका

    डियागो गार्सिया सुदूर, सुरक्षित और हिन्द महासागर के केंद्र में स्थित होने के कारण अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से यह द्वीप काफी महत्वपूर्ण है। इस द्वीप से भारत के दक्षिणी तट की लम्बाई 970 समुद्री मील, श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिम भाग से 925 समुद्री मील, हॉरमुज जलडमरूमध्य से 2,200 समुद्री मील दूर और मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने से 1600 समुद्री मील दूर है। इस द्वीप पर अमेरिका के 1700 सैन्यकर्मी और 1500 नागरिक कॉन्ट्रैक्टर्स है, इसमें 50 ब्रिटिश सैनिक शामिल है। इस द्वीप का उपयोग अमेरिकी नौसेना और वायु सेना दोनों ही संयुक्त रूप से करते हैं। 1991 के खाड़ी युद्ध में, 1998 के इराक युद्ध में और 2001 के दौरान अफगानिस्तान में कई हवाई अभियानों को डिएगो गार्सिया अड्डे से ही संचालित किया गया था। अब अमेरिका इस नेवल बेस की मदद से चीन की हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों पर नजर रख रहा है।


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