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चीन ने फिर की गलवान हिंसा की जांच की मांग

Edited By Priyesh Mishra |

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

भारतीय और चीनी सेनाभारतीय और चीनी सेना

हाइलाइट्स

  • चीन ने भारत से गलवान हिंसा के जांच की मांग की, बोला- रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
  • चीनी दूतावास ने अपनी मासिक पत्रिका में भारत-चीन संबंधों को सुधारने की बात की
  • चीन ने कहा- दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने आपसी संबंधों को लेकर एक विजन रखा है, इसी पर हमें आगे बढ़ना चाहिए

पेइचिंग


चीन ने एक बार फिर गलवान में 15 जून को हुई हिंसा को लेकर उल्टा भारत पर आरोप लगाए हैं। भारत में चीनी दूतावास की मासिक पत्रिका चाइना-इंडिया रिव्यू के जुलाई अंक में कहा गया है कि भारत को 15 जून को गलवान में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के मामले की जांच करानी चाहिए। दोनों देशों के बीच लद्दाख सीमा पर जारी तनाव को कम करने के लिए कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इसका कोई हल निकलता दिखाई नहीं दे रहा है।


भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बातचीत का जिक्र


इस पत्रिका में 17 जून को चीन के विदेश मंत्री वांग यी और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की फोन पर हुई बातचीत का भी जिक्र किया गया है। जिसमें एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री को दो टूक लहजे में आक्रामकता के लिए चीनी सेना को दोषी बताया था। इस बातचीत के दौरान चीनी विदेश मंत्री ने भारतीय सेना पर सीमा पार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने भारत से कार्रवाई की मांग भी की थी।

चीन बोला- रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं


इसमें यह भी कहा गया है कि भारत को सीमा विवाद के कारण चीन से अपने रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए। हर देश के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आता रहता है। दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने आपसी संबंधों को लेकर एक विजन रखा है, इसी पर हमें आगे बढ़ना चाहिए।

पैंगोंग और देपसांग इलाकों में अब भी गतिरोध


बता दें कि पैंगोंग और देपसांग दो ऐसे इलाके हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं अब भी आमने-सामने जमी हुई हैं। कई दौर की मैराथन बातचीत के बाद भी चीन इन इलाकों से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ है। पैंगोंग सो एरिया में चीनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) लंबे वक्त से भारतीय इलाके में 8 किलोमीटर तक घुसी हुई है। भारत चाहता है कि पैंगोंग सो झील के उत्तरी इलाके में तैनात PLA के 3 हजार से ज्यादा सैनिक अपनी पुरानी स्थिति यानी सिरिजप-1 और 2 में लौट जाएं। कई राउंड की बातचीत में भी चीन इस पर राजी नहीं हुआ है।

पैंगोंग सो में मौजूदा स्थिति


ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट Detresfa की सैटलाइट तस्वीर के अनुसार, फॉक्सहोल पॉइंट के पश्चिम में 3 किलोमीटर की दूरी पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की उपस्थिति बनी हुई है। वहीं इस कैंप से कुछ किलोमीटर पीछे चीनी सेना के सपोर्ट कैंप भी मौजूद हैं। दूसरी तरफ भारतीय सैनिक भी फिंगर 2 और फिंगर 3 के बीच में धन सिंह थापा पोस्ट की तरफ पीछे हटे हैं। इस इलाके में भारत परंपरागत तौर पर फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता आया है जबकि चीन के सैनिक इस फिंगर से पीछे पेट्रोलिंग करते थे।

चीन ने तैनात किए 18 पेट्रोल बोट्स

  • चीन ने तैनात किए 18 पेट्रोल बोट्स

    ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट Detresfa की सैटलाइट तस्वीर के अनुसार, चीन ने पैंगोंग झील इलाके में 18 की संख्या में पेट्रोल बोट तैनात कर रखा है। हॉइ स्पीड से चलने वाली ये पेट्रोल बोट न केवल पानी में गश्त के काम आ रही हैं, बल्कि इनमें छोटे और मध्यम दूरी तक मार करने वाले हथियार भी तैनात हैं। हालांकि उनके ये बोट अभी एलएसी के चीन वाले इलाके में ही गश्त कर रहे हैं।

  • जून में ली गई तस्वीरों से खुली चीन की पोल

    जून में ली गई इन सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार पैंगोंग झील के किनारे चीन ने इन बोट्स के रुकने के लिए डॉकयार्ड, रिपेयरिंग डिपो और रडार स्टेशन भी बनाया हुआ है। इनके अलावा सैनिकों के रुकने के लिए शेल्टर का भी निर्माण किया गया है। इनके आसपास बिजली के लिए सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इन तस्वीरों में चीनी पेट्रोल बोट साफ नजर आ रहे हैं।

  • पैंगोंग सो एरिया में कहां फंसा है पेच

    पैंगोंग सो एरिया में चीनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) लंबे वक्त से भारतीय इलाके में 8 किलोमीटर तक घुसी हुई है। भारत चाहता है कि पैंगोंग सो झील के उत्तरी इलाके में तैनात PLA के 3 हजार से ज्यादा सैनिक अपनी पुरानी स्थिति यानी सिरिजप-1 और 2 में लौट जाएं। कई राउंड की बातचीत में भी चीन इस पर राजी नहीं हुआ है।

  • पैंगोंग सो में मौजूदा स्थिति

    ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट Detresfa की सैटलाइट तस्वीर के अनुसार, फॉक्सहोल पॉइंट के पश्चिम में 3 किलोमीटर की दूरी पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की उपस्थिति बनी हुई है। वहीं इस कैंप से कुछ किलोमीटर पीछे चीनी सेना के सपोर्ट कैंप भी मौजूद हैं। दूसरी तरफ भारतीय सैनिक भी फिंगर 2 और फिंगर 3 के बीच में धन सिंह थापा पोस्ट की तरफ पीछे हटे हैं। इस इलाके में भारत परंपरागत तौर पर फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता आया है जबकि चीन के सैनिक इस फिंगर से पीछे पेट्रोलिंग करते थे।

  • देपसांग एरिया में क्या है पेच

    पैंगोंग सो एरिया की तरह ही देपसांग में भी गतिरोध बना हुआ है। यहां चीनी सैनिकों ने पट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 12 और 13 पर भारतीय सेना की पट्रोलिंग को रोकना जारी रखा है। इन चारों पॉइंट्स पर इंडियन आर्मी परंपरागत तौर पर पेट्रोलिंग करती आई है। गलवान के उत्तर में स्थित देपसांग रणनीतिक तौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसकी वजह यह है कि यह काराकोरम दर्रे से सटे रणनीतिक तौर पर अहम दौलत बेग ओल्डी पर भारत के पोस्ट के करीब है।


देपसांग एरिया में क्या है पेच


पैंगोंग सो एरिया की तरह ही देपसांग में भी गतिरोध बना हुआ है। यहां चीनी सैनिकों ने पट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 12 और 13 पर भारतीय सेना की पट्रोलिंग को रोकना जारी रखा है। इन चारों पॉइंट्स पर इंडियन आर्मी परंपरागत तौर पर पेट्रोलिंग करती आई है। गलवान के उत्तर में स्थित देपसांग रणनीतिक तौर पर बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसकी वजह यह है कि यह काराकोरम दर्रे से सटे रणनीतिक तौर पर अहम दौलत बेग ओल्डी पर भारत के पोस्ट के करीब है।

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