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चीन ने ब्रिटेन को US का गुर्गा बता दी चेतावनी

Edited By Priyesh Mishra |

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

शी जिनपिंग और बोरिस जॉनसनशी जिनपिंग और बोरिस जॉनसन

हाइलाइट्स

  • रॉयल नेवी की तैनाती पर भड़का चीन, ब्रिटेन को बताया अमेरिका का गुर्गा
  • चीन न कहा- अच्छे समय में ब्रिटेन ने उठाया हमारा फायदा, अब हमें बता रहा वैश्विक खतरा
  • चीनी मीडिया ने ब्रिटेन को दी चेतावनी, कहा- हमने 5 साल में ब्रिटिश नौसेना से ज्यादा अपनी क्षमता बढ़ाई

पेइचिंग


अमेरिका के बाद ब्रिटिश सैनिकों की तैनाती को लेकर चीन ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। चीन के सरकारी समाचारपत्र ग्लोबल टाइम्स ने ब्रिटेन को धमकी देते हुए उसे अमेरिका का गुर्गा करार दिया। सरकारी मीडिया ने कहा कि ब्रिटेन चीन के खिलाफ एक और अफीम युद्ध की तैयारी कर रहा है। बता दें कि अफीम युद्ध में ब्रिटेन ने चीन से हॉन्ग कॉन्ग सहित आसपास के बड़े इलाके को छीन लिया था।


ब्रिटेन अवसरवादी, चीन के संबंधों का उठाया फायदा


ग्लोबल टाइम्स ने ब्रिटेन को अवसरवादी करार देते हुए कहा कि उसने अच्छे समय में चीन से खूब फायदा कमाया और अब हमें वैश्विक खतरा करार दे रहा है। अखबार ने पूछा कि चीन हजारों किलोमीटर दूर अटलांटिक महासागर में स्थित एक देश के लिए कैसे खतरा हो सकता है। उल्टा चीनी मीडिया ने ब्रिटेन पर उपनिवेशवादी और विस्तारवादी होने का आरोप लगा दिया।

यह 19वीं सदी का चीन नहीं, हमारी ताकत ज्यादा


ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि यह 19वीं सदी नहीं है। चीन ने अपने सैन्य ताकत को तेजी से विकसित किया है। इतना ही नहीं, बड़बोलापन दिखाते हुए ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि चीन ने पिछले पांच साल में पूरी ब्रिटिस नेवी से ज्यादा अपना विस्तार किया है। लेकिन, चीन यह भूल गया कि उसी नौसेना युद्ध के मामले में अभी भी अनाड़ी है।

पनडुब्बी के बाद जापान ने खदेड़ा चीनी बॉम्बर, एशिया में घिरे चीन ने दी धमकी

चीन के साथ व्यवहार को लेकर दी चेतावनी


ग्लोबल टाइम्स ने ब्रिटेन को समझाइश देते हुए कहा कि उसे यह पता लगाने की जरूरत है कि चीन के साथ कैसा व्यवहार किया जाए। चीन की अगुवाई में पूर्वी एशियाई देशों ने दशकों के तीव्र विकास और समृद्धि को अपनाया है। हालाँकि, ऐसा लगता है कि यूके और कुछ अन्य पश्चिमी देशों ने अपनी सोच में कोई प्रगति नहीं की है। चीन का सामना करना ब्रिटेन को उसके पुराने गौरव को वापस पाने में मदद नहीं कर सकता।

US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

  • US के तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

    अमेरिका ने पहले ही ताइवान के समीप अपने तीन न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात कर दिया है। जिसमें से दो ताइवान और बाकी मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं, वहीं तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर जापान के पास गश्त लगा रहा है। अमेरिका ने जिन तीन एयरक्राफ्ट कैरियर को प्रशांत महासागर में तैनात किया है वे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, यूएसएस निमित्ज और यूएसएस रोनाल्ड रीगन हैं।

  • अमेरिका यूं ही नहीं भेज रहा सेना

    अमेरिका के पास दुनिया की सबसे आधुनिक सेना और हथियार हैं। दुनियाभर के देशों की सैन्य ताकत का आंकलन करने वाली ग्लोबल फायर पॉवर इंडेक्स के अनुसार 137 देशों की सूची में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के मामले में अमेरिका दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के दुनिया में 800 सैन्य ठिकाने हैं। इनमें 100 से ज्यादा खाड़ी देशों में हैं। जहां 60 से 70 हजार जवान तैनात हैं।

  • एशिया में किन-किन देशों को चीन से खतरा

    एशिया में चीन की विस्तारवादी नीतियों से भारत को सबसे ज्यादा खतरा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है। इसके अलावा चीन और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है। हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के प्रयोग की धमकी दे चुका है। इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं चीन का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी विवाद है।

  • एशिया में 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

    फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे एशिया में चीन के चारों ओर 2 लाख से ज्यादा अमेरिकी सेना के जवान हर वक्त मुस्तैद हैं और किसी भी अप्रत्याशित हालात से निपटने में भी सक्षम हैं। वहीं चीन की घेराबंदी में अमेरिका और अधिक संख्या में एशिया में अपनी सेना को तैनाक करने की तैयारी कर रहा है। इससे विवाद और गहराने के आसार हैं। जानिए एशिया मे कहां-कहां है अमेरिकी सैन्य ठिकाने-

  • डियेगो गार्सिया से हिंद महासागर पर नजर

    मालदीव के पास स्थित डियेगो गार्सिया में अमेरिकी नेवी और ब्रिटिश नेवी मौजूद है। यह द्वीप उपनिवेश काल से ही ब्रिटेन के कब्जे में है और हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस लोकेशन से चीनी नौसेना की हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है।

  • जापान में अमेरिका की तीनों सेना मौजूद

    जापान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिकी सेना मौजूद है। एक अनुमान के मुताबिक यहां अमेरिकी नेवी, एयरफोर्स और आर्मी के कुल 10 बेस हैं जहां एक लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका और जापान में हुई संधि के अनुसार इस देश की रक्षा की जिम्मेदारी यूएस की है। यहां से साउथ चाइना सी पर भी अमेरिका आसानी से नजर रख सकता है।

  • गुआम से उत्तर कोरिया को कंट्रोल करता है US

    प्रशांत महासागर में स्थित इस छोटे से द्वीप पर अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण रणनीतिक मौजूदगी है। इस द्वीप से अमेरिकी सेना न केवल प्रशांत महासागर में चीन और उत्तर कोरिया की हरकतों पर नजर रख सकता है बल्कि उन्हें मुंहतोड़ जवाब देने और नेवल ब्लॉकेज लगाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। यहां 5000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती है।

  • साउथ कोरिया में तैनात है अमेरिकी फोर्स

    उत्तर कोरिया के कोप से बचाने के लिए दक्षिण कोरिया में अमेरिकी फौज तैनात है। जिसमें आर्मी, एयरफोर्स, मरीन कॉर्प और यूएस नेवी के जवान शामिल हैं। यहां से अमेरिका चीन की हरकतों पर भी निगाह रखता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यहां 28500 ट्रूप्स तैनात हैं।

  • फिलीपींस में भी US बेस, चीन पर नजर

    चीन के नजदीक फिलीपींस में भी अमेरिकी सेना का बेस मौजूद है। हाल मे ही फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे ने अमेरिका के साथ दो दशक पुराने विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA)को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बता दें कि 2016 में सत्ता में आने के बाद से रोड्रिगो डुटर्टे का झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। जिस कारण अमेरिका से फिलीपीन्स की तल्खियां भी बढ़ी थी।

  • ताइवान में बेस तो नहीं, लेकिन US की उपस्थिति ज्यादा

    ताइवान में अमेरिकी सेना का कोई स्थायी बेस नहीं है, लेकिन यहां अमेरिकी सेना अक्सर ट्रेनिंग और गश्त को लेकर आती जाती रहती है। वर्तमान समय में भी अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियर इस इलाके में तैनात हैं। अमेरिका शुरू से ही ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थक रहा है। हाल के दिनों में चीन से बढ़ते टकराव के बाद से अमेरिका ने पूर्वी चीन सागर और ताइवान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी शुरू कर दी है।

  • अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक

    अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक मौजूद हैं। इसके अलावा यहां गठबंधन सेनाओं के आठ हजार सैनिक भी हैं जो तालिबान के खिलाफ अक्सर कार्रवाईयों को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि अमेरिका ने हाल के दिनों में अफगानिस्तान में तैनाक अपने सैनिकों की जानकारी नहीं दी है। अमेरिकी सैनिक बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।

  • इन देशों में भी अमेरिकी सेना तैनात

    सिंगापुरएसेसन द्वीपकजाखिस्तान


चीन से निपटने के लिए ब्रिटेन एशिया में भेज रहा सैनिक


फाइनेंशियल टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के खतरे से निपटने लिए अमेरिका का करीबी सहयोगी ब्रिटेन भी एशिया में अपने सैनिक भेज रहा है। ब्रिटेन की सेना का मानना है कि एशियाई सहयोगी देशों के साथ नजदीकी संबंध रखकर, कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता का इस्‍तेमाल करके और स्‍वेज नहर के पास और ज्‍यादा सैनिक तैनात करके चीन पर नकेल कसा जा सकता है। इसके लिए ब्रिटेन के तीनों ही सेनाओं के प्रमुख मंत्रियों से मिले थे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस के खात्‍मे के बाद दुनिया में आर्थिक संकट, विवाद और लड़ाई बढ़ जाएगी।

चीन से जंग का खतरा, हजारों सैनिक भेज रहे अमेरिका और ब्र‍िटेन

रॉयल नेवी की तैनाती करेगा ब्रिटेन


ब्रिटेन के सेना प्रमुखों की बैठक में चीन के खतरे पर सबसे ज्‍यादा चर्चा हुई। ब्र‍िटेन में चीन के साथ संबंधों को नए सिरे से पारिभाषित करने पर जोर दिया जा जा रहा है। इसके अलावा ताइवान के साथ संबंध को मजबूत करने जोर दिया जाएगा। इसके लिए ब्रिटेन दक्षिण कोरिया और जापान के साथ संबंध को और ज्‍यादा मजबूत करेगा। ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने ऐलान किया है कि वह स्‍थायी रूप से स्‍वेज नहर के पूर्व में कुछ हजार कमांडो हमेशा के लिए तैनात कर रही है। इन्‍हें संकट के समय कभी भी तैनात किया जा सकेगा। बता दें कि स्‍वेज नहर दुनिया का सबसे व्‍यस्‍त मार्ग है और चीन का बड़े पैमाने पर सामान इसी रास्‍ते से यूरोप जाता है।

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