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‚वैक्सीन राष्ट्रवाद‘ से गंभीर हो सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण, WHO की चेतावनी

| Navbharat Times | Updated: 19 Aug 2020, 05: 17: 10 PM

Covid-19 Vaccine: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वैक्सीन राष्ट्रवाद और जमाखोरी कोरोना वायरस के खतरे को और बढ़ा देगी। डब्लूएचओ के निदेशक टेड्रॉस गेब्रिएसिस ने कहा कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को कभी भी राष्ट्रवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

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‚वैक्सीन राष्ट्रवाद‘ से गंभीर हो सकता है कोरोना वायरस का संक्रमण, WHO की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वैक्सीन राष्ट्रवाद और जमाखोरी कोरोना वायरस के खतरे को और बढ़ा देगी। डब्लूएचओ के निदेशक टेड्रॉस गेब्रिएसिस ने कहा कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को कभी भी राष्ट्रवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें वैक्सीन की पहुंच सभी लोगों तक बनानी होगी, जिससे इस महामारी को जल्द से जल्द रोका जा सके।

देशों से कोवैक्स वैक्सीन फैसिलिटी में शामिल होने की अपील

टेड्रॉस गेब्रिएसिस ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन फैसिलिटी कार्यक्रम में अमीर देशों के शामिल होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की है। इस कार्यक्रम के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन गरीब देशों के साथ कोरोना वायरस वैक्सीन को साझा करेगा। इसके लिए डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देशों को एक पत्र भेजकर उन्हें जल्द से जल्द इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है।

राष्ट्रवाद से वैक्सीन की पहुंच हो सकती है बाधित

कोवैक्स कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख रूस से यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के ऊपर दबाव बना रहा है। इन देशों में कोरोना वायरस वैक्सीन का परीक्षण पहले से ही चल रहा है। इसके अलावा रूस और चीन में भी वैक्सीन का ट्रायल जोरों पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डर जताया है कि राष्ट्रवाद की भावना कोरोना वायरस वैक्सीन की वैश्विक पहुंच को बाधित कर सकते हैं।

डब्लूएचओ के साथ काम कर रहे हैं 9 वैक्सीन निर्माता

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि कोवैक्स के साथ अबतक केवल 92 गरीब देश और 80 अमीर देश ही जुड़े हैं। माना जा रहा है कि 31 अगस्त की डेटलाइन तक इस संगठन के सभी देश जुड़ जाएंगे। वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ वैक्सीन बनाने वाले 9 कैंडिडेट्स जुड़े हुए हैं। अगर इनमें से किसी की कैंडिडेट की वैक्सीन सफल हो जाती है तो उसे सभी सदस्य देशों के साथ बांटा जाएगा।

दुनिया में कहीं भी हर्ड इम्यूनिटी के हालात नहीं

कोरोना वायरस महामारी को लेकर दुनियाभर के कई देशों में दावा किया जा रहा है कि वहां संक्रमण के कारण लोगों में हर्ड इम्यूनिटी (सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता) का विकास हो गया है। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसे किसी भी दावे को खारिज करते हुए कहा है कि विश्व अभी कहीं भी कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी उत्पन्न होने जैसी स्थिति में नहीं है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ रिसर्चर्स ने पहले दावा किया था कि ब्रिटेन में लोगों के बीच हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो रही है।

वैक्सीन के जरिए ही पाई जा सकती है हर्ड इम्यूनिटी

डब्लूएचओ ने कहा कि हर्ड इम्यूनिटी विशेष तौर पर वैक्सीनेशन के माध्यम से हासिल की जाती है। अधिकतर वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में घातक वायरस को शिकस्त देने वाली एंटीबॉडीज होनी चाहिए। लेकिन, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आधी आबादी में भी कोरोना वायरस से लड़ने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) हो तो एक रक्षात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है।

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Web Title : covid-19 vaccine who warns against vaccine nationalism

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