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US ने ताइवान को दी पैट्रियॉट मिसाइल, चीन लाल

Edited By Priyesh Mishra |

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

ट्रंप, जिनपिंग और ताइवानी राष्ट्रपतिट्रंप, जिनपिंग और ताइवानी राष्ट्रपति

हाइलाइट्स

  • ताइवान को आधुनिक पैट्रियॉट मिसाइल देने पर भड़का चीन, कहा- आग से न खेलो
  • चीनी मीडिया ने कहा- घंटों में ताइवान पर कर लेंगे कब्जा, नहीं कर पाएगा विरोध
  • अमेरिका को दी नसीहत, कहा- युद्ध हुआ तो भुगतना होगा अंजाम

पेइचिंग


ताइवान को अमेरिका के पैट्रियॉट एडवांस कैपिबिलिटी-3 मिसाइलों की बिक्री से चीन को इतनी मिर्ची लगी है कि उसकी सरकारी मीडिया बिलबिलाने लगी है। 620 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत वाले इस रक्षा सौदे को अमेरिका की मंजूरी मिलने के बाद सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने सीधे तौर पर ताइवान और यूएस को आग से न खेलने की चेतावनी दे डाली। इन दिनों साउथ चाइना सी में अमेरिका के दो एयरक्राफ्ट कैरियरों के युद्धाभ्यास से भी चीन चिढ़ा हुआ है।


ताइवान के रक्षा बजट का उड़ाया मजाक


ग्लोबल टाइम्स डींगे हांकते हुए लिखा कि चीन ने अपने सैन्य शक्ति में इतना इजाफा कर लिया है कि ताइवान अमेरिका से कितना भी सैन्य उपकरण और हथियार खरीद ले इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चीनी मीडिया ने दावा किया कि ताइवान का रक्षा बजट केवल 11 बिलियन डॉलर है। जो चीनी सेना के सामने उल्लेख करने के लायक भी नहीं है।

कुछ घंटों में ही ताइवान पर कर लेंगे कब्जा


इतना ही नहीं, चीन सरकार के मुखपत्र ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि एक बार युद्ध छिड़ जाने के बाद चीनी सेना कुछ घंटों के भीतर ताइवान की समग्र सैन्य क्षमताओं को नष्ट कर उसके द्वीपों पर कब्जा करने में सक्षम है। ताइवान को चीन अपना हिस्सा बताता रहा है और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता बार-बार ताइवान के ऊपर सैन्य कार्यवाई की धमकी देते रहते हैं।

अमेरिकी युद्धाभ्यास पर भड़का चीनी मीडिया, कहा- उकसावे का देंगे जवाब

अमेरिका को सुरक्षा शुल्क चुका रहा ताइवान


अमेरिका से हथियार खरीदने पर ग्लोबल टाइम्स ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि ताइवान इन रक्षा सौदों के जरिए अमेरिका को सुरक्षा शुल्क चुका रहा है। ताइवान की अपने लोगों की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। ताइवान की रक्षा को पारंपरिक तरीके से नहीं आंका जा सकता है। यह केवल रणनीतिक संतुलन का परिणाम है। चीन की शक्ति के सामने ताइवान कहीं नहीं टिकता।

एशिया में बुरी तरह घिर रहा चीन

  • एशिया में बुरी तरह घिर रहा चीन

    भारत के साथ लद्दाख में तनातनी के बीच चीन का पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर जापान से भी विवाद गहरा गया है। जवाब में जापान ने भी इन द्वीपों की रक्षा के लिए अपनी नौसेना को तैनात कर दिया है। हाल में ही जापानी नौसेना ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था। चीन की यह पनडुब्बी जापान की रेकी कर रही थी। इसी तरह फिलीपीन और मलेशिया के साथ भी चीन के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वहीं, ताइवान ने तो सीधे तौर पर चीन को युद्ध की चेतावनी दे डाली है।

  • चीन पर अमेरिकी तेवर तल्ख

    बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस को लेकर कई बार चीन के ऊपर सीधे तौर पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में कोरोना वायरस को चीनी वायरस या वुहान वायरस कह कर भी संबोधित किया था। चीन ने भी इसका पलटवार करते हुए अमेरिका पर कई तरह के आरोप लगाए थे। इन सबके बीच अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती से साउथ चाइना सी में फिर से विवाद गहराने की आशंका है।

  • चीन ने भी किया पलटवार

    चीन ने एक दिन पहले ही अमेरिका को चेतावनी दी थी कि जापान जैसे देशों में अपनी सैन्य तैनाती न करे। चीन ने यहां तक दावा किया है कि अगर अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है तो चीन भी हर जवाब के लिए तैयार रहेगा। दरअसल, हाल ही में जापान और अमेरिका ने साउथ चाइना सी में संयुक्त ड्रिल भी की है। हालांकि, जापान अमेरिका के ऐंटी-मिसाइल सिस्टम को तैनात करने से फिलहाल रोक चुका है।

  • ये हैं 2 अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर

    अमेरिका ने जिन दो एयरक्राफ्ट कैरियर को ताइवान के पास तैनात किया है वे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट, यूएसएस निमित्ज हैं। फिलीपीन सागर के गुआम के आस पास के इलाके में गश्त कर रहे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और यूएसएस निमित्ज चीन के आस पास के इलाके में गश्त भी करेंगे। इन दोनों के अलावा यूएसएस रोनाल्ड रीगन जापान के दक्षिण में फिलीपीन सागर तैनात है।

  • चीन को पहले ही चेतावनी दे चुका है अमेरिका

    अमेरिका पहले भी चीन को साउथ चाइना सी में आक्रामक व्यवहार को लेकर चेतावनी दे चुका है। अप्रैल में चीनी युद्धपोतों ने वियतनाम की एक मछली पकड़ने वाली नौका को साउथ चाइना सी में डुबा दिया था। चीन का आरोप था कि यह जहाज उसके इलाके में मछली पकड़ रहा था। बता दें कि इस क्षेत्र में चीन ने कई आर्टिफिशियल आइलैंड का निर्माण कर उसे मिलिट्री स्टेशन के रूप में विकसित किया है।

  • चीन समुद्र में चला रहा पावर गेम

    साउथ चाइना सी में ‚जबरन कब्‍जा‘ तेज कर दिया है। पिछले रविवार को चीन ने साउथ चाइना सी की 80 जगहों का नाम बदल दिया। इनमें से 25 आइलैंड्स और रीफ्स हैं, जबकि बाकी 55 समुद्र के नीचे के भौगोलिक स्‍ट्रक्‍चर हैं। यह चीन का समुद्र के उन हिस्‍सों पर कब्‍जे का इशारा है जो 9-डैश लाइन से कवर्ड हैं। यह लाइन इंटरनैशनल लॉ के मुताबिक, गैरकानूनी मानी जाती है। चीन के इस कदम से ना सिर्फ उसके छोटे पड़ोसी देशों, बल्कि भारत और अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है।


संप्रभुता को लेकर अमेरिका-ताइवान को धमकी


चीनी मीडिया ने अमेरिका और ताइवान को चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर एक बार रणनीतिक गलती के कारण ताइवान की खाड़ी में गोली चलती है तो बड़े पैमाने पर युद्ध होने की संभावना है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि अमेरिका और ताइवान आग से न खेलें। एक बार जब इस क्षेत्र में युद्ध छिड़ जाएगा तो चीन हर कीमत पर राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करेगा।

कितनी खतरनाक है अमेरिका की पैट्रियॉट मिसाइल


अमेरिका की पैट्रियॉट एडवांस्ड कैपेबिलिटी – 3 (PAC-3) मिसाइस दुनिया की सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम में से एक है। यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू जहाजों को पल भर में मार गिराने में सक्षम है। सभी मौसम में दागे जाने वाली इस मिसाइल का निर्माण लॉकहिड मॉर्टिन ने किया है।

वर्तमान में इन देशों में तैनात है यह मिसाइल


पैट्रियॉट एडवांस्ड कैपेबिलिटी – 3 मिसाइल इस समय पूरे अमेरिका, जर्मनी, ग्रीस, इजरायल, जापान, कुवैत, नीदरलैंड, सऊदी अरब, कोरिया, पोलैंड, स्वीडन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, रोमानिया, स्पेन और ताइवान की सेना में शामिल है। 2003 के इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने पैट्रियॉट मिसाइल सिस्टम को तैनात किया। कुवैत में तैनात इस मिसाइल डिफेंस सिट्म ने दुश्मनों की कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था।

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